Parasnath Hill – मोक्ष का रहस्य
झारखंड के गिरिडीह ज़िले में स्थित पारसनाथ पहाड़ी, जिसे शिखरजी के नाम से भी जाना जाता है, जैन धर्म का सबसे पवित्र तीर्थ माना जाता है। यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सदियों से मोक्ष, आध्यात्मिक ऊर्जा और अद्भुत शांति का प्रतीक रहा है। मान्यता है कि यहीं से आत्मा संसार के बंधनों से मुक्त होकर अंतिम सत्य की ओर बढ़ती है। यही कारण है कि पारसनाथ पहाड़ी को “मोक्ष का द्वार” कहा जाता है।
पारसनाथ पहाड़ी का धार्मिक महत्व
जैन धर्म के अनुसार, 24 में से 20 तीर्थंकरों ने इसी पर्वत पर निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त किया था। विशेष रूप से भगवान पार्श्वनाथ, जो जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर थे, के नाम पर ही इस पर्वत का नाम पारसनाथ पड़ा। हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु कठिन यात्रा तय कर यहाँ दर्शन के लिए पहुँचते हैं।
भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक सौंदर्य
पारसनाथ पहाड़ी की ऊँचाई लगभग 1,365 मीटर है, जो इसे झारखंड की सबसे ऊँची चोटी बनाती है। चारों ओर फैले घने जंगल, बादलों से ढकी चोटियाँ और ठंडी हवाएँ इस स्थान को रहस्यमय बना देती हैं। सुबह के समय जब पहाड़ी कोहरे से ढकी होती है, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो यह स्थान पृथ्वी से अलग किसी और ही लोक में स्थित हो।
मोक्ष का रहस्य क्या है?
श्रद्धालुओं का मानना है कि पारसनाथ पहाड़ी पर पहुँचते ही मन अपने आप शांत हो जाता है। कई लोग बताते हैं कि यहाँ ध्यान करते समय उन्हें एक अलग तरह की आंतरिक शांति और ऊर्जा का अनुभव होता है। वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो ऊँचाई, शुद्ध हवा और एकांत वातावरण मानसिक शांति में सहायक होते हैं, लेकिन भक्त इसे आध्यात्मिक शक्ति से जोड़ते हैं। यही द्वंद्व—आस्था और विज्ञान—इस स्थान को और रहस्यमय बना देता है।
कठिन लेकिन पवित्र यात्रा
पारसनाथ पहाड़ी की चढ़ाई आसान नहीं है। श्रद्धालुओं को लगभग 9 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है। जैन साधु-संत और भक्त यह यात्रा नंगे पाँव, उपवास और मौन के साथ करते हैं। यह यात्रा केवल शरीर की परीक्षा नहीं, बल्कि मन और आत्मा की भी परीक्षा मानी जाती है।
शिखरजी मंदिर का महत्व
पहाड़ी की चोटी पर स्थित शिखरजी मंदिर अत्यंत पवित्र माना जाता है। यहाँ स्थापित चरण-चिह्न (पादुका) उन तीर्थंकरों की स्मृति हैं जिन्होंने यहाँ मोक्ष प्राप्त किया। मंदिर परिसर में फैली शांति और अनुशासन हर आगंतुक को गहरे आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करता है।
कब जाएँ पारसनाथ पहाड़ी
अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यहाँ जाने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान मौसम ठंडा और सुहावना रहता है, जिससे यात्रा अपेक्षाकृत आसान हो जाती है।
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