मां वैष्णो शक्तिपीठ धाम, डाला-बारी: आस्था, चमत्कार और दिव्यता का अद्भुत संगम
सोनभद्र के डाला-बारी क्षेत्र में स्थित मां वैष्णो शक्तिपीठ धाम आज न सिर्फ जिले, बल्कि बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और आसपास के राज्यों के श्रद्धालुओं का प्रमुख आस्था-केंद्र बन चुका है। वाराणसी-शक्तिनगर मुख्य मार्ग पर स्थित यह भव्य मंदिर अपनी दिव्यता, चमत्कारों और प्राकृतिक गुफानुमा बनावट के लिए प्रसिद्ध है।
स्थापना का अद्भुत इतिहास
सन 2001 में हुई एक भीषण सड़क दुर्घटना ने इस मंदिर की नींव रखी। चोपन निवासी मदनलाल गर्ग की कार तेज रफ्तार ट्रक से टकरा गई थी, लेकिन चमत्कारिक रूप से वे बिल्कुल सुरक्षित बाहर निकले। इसी घटना को मां वैष्णो की कृपा मानते हुए मंदिर निर्माण का संकल्प लिया गया। उस समय यह पूरा क्षेत्र घना जंगल था जहाँ बाघ और अन्य जंगली जानवरों का आना-जाना आम था।
2004 में जम्मू के कटरा से मां वैष्णो की अखंड ज्योति सोनभद्र लाई गई और शारदीय नवरात्र में सभी विग्रहों की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। यह अखंड ज्योति आज भी निरंतर जल रही है।
मंदिर की विशेषताएँ
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प्राकृतिक गुफानुमा संरचना इसकी सबसे बड़ी खूबी है।
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गुफा में जंगल, पर्वत और जंगली जीव जैसे हाथी, बाघ, चीता, भालू, बंदर आदि के कलात्मक प्रतिरूप मन मोह लेते हैं।
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अखंड ज्योति के आगमन के दिन अचानक तेज हवा, गर्जन और घनघोर बारिश ने भक्तों को दिव्य उपस्थिति का एहसास कराया।
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मनोकामना पूरी होने की मान्यता के कारण भक्त मंदिर प्रांगण में नारियल बांधते हैं।
वास्तुकला की अनोखी झलक
उड़ीसा के प्रसिद्ध आर्किटेक्ट आर.के. पेरेरा द्वारा निर्मित यह मंदिर लगभग एक बीघा क्षेत्र में फैला हुआ है।
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तीन मंजिला यह मंदिर 725 वर्ग मीटर में बनी विस्तृत गुफा से होकर गुजरता है।
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मध्य भाग में मां वैष्णो देवी का विग्रह स्थापित है।
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प्रथम तल पर मां महालक्ष्मी और द्वितीय तल पर माता नवदुर्गा की स्थापना है।
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साथ ही भगवान शंकर, वीर हनुमान, भैरव बाबा, माता गायत्री और ब्रह्मा जी के भी सुंदर मंदिर बने हुए हैं।
भक्तों की सुविधा और व्यवस्थाएँ
दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए—
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विशाल प्रेक्षागृह
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विवाह/अनुष्ठान हेतु कमरे
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धर्मशाला का निर्माण किया गया है।
पूरे मंदिर परिसर में सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था है, जिससे सुरक्षा पर चौबीसों घंटे ध्यान रखा जाता है। अग्रवाल धर्मार्थ समिति श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखती है।
भक्तों का विश्वास
रोजाना यहां सैकड़ों श्रद्धालु आते हैं, जबकि रामनवमी और अन्य पर्वों पर भक्तों की संख्या लाखों में पहुँच जाती है। माना जाता है कि मां सच्चे मन से की गई हर मनोकामना अवश्य पूरी करती हैं।
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