🌊 लोकतक झील – मणिपुर की जीवनरेखा, संस्कृति और तैरती हुई प्रकृति का अनोखा चमत्कार 🌿
भारत के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में स्थित लोकतक झील (Loktak Lake) न केवल राज्य की सबसे बड़ी झील है,
बल्कि यह पूरे भारत की सबसे अनोखी और रहस्यमयी झीलों में से एक मानी जाती है। इसे अक्सर “मणिपुर की आत्मा” कहा जाता है, क्योंकि यह झील वहाँ के लोगों की संस्कृति, परंपरा, आजीविका और प्रकृति से गहराई से जुड़ी हुई है। लोकतक झील अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अपने विशिष्ट पारिस्थितिकी तंत्र के कारण भी विश्वभर में प्रसिद्ध है।
फुमदी – तैरते हुए द्वीपों का अद्भुत संसार
लोकतक झील की सबसे खास पहचान है यहाँ पाई जाने वाली “फुमदी (Phumdi)”। फुमदी वास्तव में तैरती हुई जैविक संरचनाएँ होती हैं, जो घास, मिट्टी, जलीय पौधों और सड़े हुए जैविक पदार्थों से बनती हैं। ये फुमदी झील की सतह पर तैरते हुए छोटे-बड़े द्वीपों का रूप ले लेती हैं।
इन्हीं फुमदियों पर कई स्थानों पर लोग घर बनाकर रहते हैं और कृषि व मछली पालन जैसी गतिविधियाँ करते हैं। दुनिया में ऐसी तैरती हुई संरचनाएँ बहुत ही कम स्थानों पर देखने को मिलती हैं, और लोकतक झील इस मामले में पूरी तरह अद्वितीय है।
केइबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान और संगई हिरण
लोकतक झील के बीच स्थित केइबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान इसे और भी विशेष बना देता है। यह उद्यान दुनिया का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान है, जो पूरी तरह फुमदियों पर आधारित है।
यही उद्यान दुर्लभ और संकटग्रस्त संगई हिरण (Sangai Deer) का प्राकृतिक आवास है। संगई हिरण को उसकी सुंदर और लयबद्ध चाल के कारण “डांसिंग डियर” कहा जाता है। यह हिरण मणिपुर का राज्य पशु है और स्थानीय लोगों के लिए गर्व व पहचान का प्रतीक है।
लोकतक झील: आजीविका और जीवनरेखा
लोकतक झील मणिपुर के लोगों की आर्थिक और सामाजिक जीवनरेखा भी है। झील पर आधारित मछली पालन यहाँ की सबसे महत्वपूर्ण आजीविका में से एक है। हजारों परिवार पीढ़ियों से इसी झील पर निर्भर हैं।
इसके अलावा जल कृषि, नाव परिवहन और पर्यटन भी स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हैं। सुबह के समय झील पर छाई हल्की धुंध, पानी पर तैरती नावें और फुमदी पर उगती हरियाली लोकतक को एक जीवंत चित्रकला जैसा बना देती हैं।

पर्यावरणीय महत्व और संरक्षण
पर्यावरणीय दृष्टि से भी लोकतक झील का महत्व अत्यंत अधिक है। इसे रामसर साइट के रूप में मान्यता प्राप्त है, जिसका अर्थ है कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि है।
हालाँकि, आधुनिक विकास, बढ़ता प्रदूषण, जल प्रवाह में बदलाव और मानवीय हस्तक्षेप के कारण लोकतक झील का पारिस्थितिकी संतुलन आज गंभीर खतरे में है।
यदि समय रहते संरक्षण और सतत विकास की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह अनोखी तैरती हुई दुनिया भविष्य में केवल इतिहास बनकर रह सकती है।
लोकतक झील हमें सिखाती है कि प्रकृति और मानव के बीच संतुलन बनाए रखना ही सच्चा विकास है। इसका संरक्षण केवल मणिपुर की नहीं, बल्कि पूरे देश और दुनिया की साझा जिम्मेदारी है।














