🪨 गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देती चट्टान – महबलिपुरम का कृष्णा बटरबॉल

तमिलनाडु के महबलिपुरम (Mahabalipuram) में स्थित एक रहस्यमयी चट्टान आज भी विज्ञान और इतिहास दोनों के लिए एक अनसुलझी पहेली बनी हुई है। यह विशाल गोलाकार चट्टान लगभग 200 टन वजनी, करीब 20 फुट ऊँची और लगभग 5 मीटर चौड़ी है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह चट्टान 45 डिग्री की ढलान पर दूसरी चट्टान के ऊपर टिकी हुई है।

इसे देखकर ऐसा लगता है कि यह किसी भी क्षण नीचे लुढ़क सकती है, लेकिन सैकड़ों वर्षों से यह चट्टान भूकंप, तेज़ आंधियों और प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद अपनी जगह से हिली तक नहीं है।

🤔 सबसे बड़ा सवाल – यह यहाँ पहुँची कैसे?

विज्ञान के सामने आज भी यह सवाल बना हुआ है कि—

  • इतना विशाल पत्थर यहाँ किसने लाकर रखा?
  • अगर यह प्राकृतिक रूप से कहीं से लुढ़क कर आया, तो इतनी ढलान पर आकर रुक कैसे गया?
  • और इतने वर्षों में यह नीचे क्यों नहीं गिरा?

इन सवालों का कोई ठोस वैज्ञानिक उत्तर आज तक नहीं मिल पाया है।

🐘 जब 7 हाथी भी न हिला पाए पत्थर

कहानी है कि 1908 में ब्रिटिश शासन के दौरान मद्रास (अब चेन्नई) के गवर्नर Arthur Lawley को डर था कि यह चट्टान कभी भी गिर सकती है और किसी की जान जा सकती है।

उन्होंने इस पत्थर को हटाने के लिए 7 हाथियों की मदद ली, लेकिन काफी प्रयासों के बाद भी यह चट्टान टस से मस नहीं हुई। अंततः इसे उसी अवस्था में छोड़ दिया गया।

🌍 आज का प्रमुख पर्यटन स्थल

आज यह स्थान एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बन चुका है। हर साल हजारों पर्यटक यहाँ आते हैं—

  • लोग इसके नीचे बैठते हैं
  • इसे धक्का देने की कोशिश करते हैं
  • लेकिन किसी प्रकार की कोई पाबंदी नहीं है

फिर भी, यह चट्टान आज भी वैसी ही स्थिर और अडिग खड़ी है।

🧈 कृष्णा बटरबॉल नाम कैसे पड़ा?

इस रहस्यमयी पत्थर को आज “Krishna’s Butterball” कहा जाता है।

स्थानीय मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण को मक्खन अत्यंत प्रिय था। कहा जाता है कि एक बार उनके हाथ से मक्खन का गोला यहाँ गिर गया, जो समय के साथ सूखकर पत्थर बन गया।

✨ निष्कर्ष

कृष्णा बटरबॉल केवल एक चट्टान नहीं, बल्कि
➡️ प्रकृति, इतिहास, आस्था और विज्ञान का अद्भुत संगम है।

यह आज भी गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देती हुई खड़ी है और इंसान को सोचने पर मजबूर कर देती है—
क्या हर रहस्य का उत्तर विज्ञान के पास होता है?

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